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मन कहलस कि

मन कहलस कि

मन कहलस कि चलऽ एसएमएस करीं.
सोचनी कि ई पागलपन हऽ
रात अधरतिया केहू के एसएमएस कइल.
फेर सोचनी कि जाए दऽ
जेकरा के करत बानीं
उहो त पागले हऽ.




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जिनिगी से अकुलाईं मत

जिनिगी से अकुलाईं मत,
रो रो के पछताईं मत.
आँसू के कीमत समुझीं,
जहें तहें ढरकाईं मत.

सतसइया के दोहरे

सतसइया के दोहरे
अरु नावक के तीर
देखन में एसएमएस लगें
घाव करें गम्हीर.

ना जाने कब कवनो

ना जाने कब कवनो तारा टूट जाय
ना जाने कब आँख के आँसू छूट जाय.
कुछ घरी हमरा संगे हँस लऽ ए दोस्त.
का जाने कब तोहार सामने के दाँत टूट जाय

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