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तन के, मन के

तन के, मन के

तन के, मन के, घर आंगन के कीचड़ पाँक हटा दीं.
प्रेम प्रीत के रंग अबीर हँस के खूब लगा दीं.




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आज के काम

आज के काम काल्हु कइल जाई,
काल्हु के परसो.
जल्दी जल्दी का बा जब,
जिए के बा अभी बरसों.

साँच के हरान भले

साँच के हरान भले कर दिहल जाव,
हरावल ना जा सके.
साँच पर टिकल रहऽ ऐ दोस्त,
आखिरी जीत तहरे होखी.

मन कहलस कि

मन कहलस कि चलऽ एसएमएस करीं.
सोचनी कि ई पागलपन हऽ
रात अधरतिया केहू के एसएमएस कइल.
फेर सोचनी कि जाए दऽ
जेकरा के करत बानीं
उहो त पागले हऽ.

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