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रात कब हो गइल

रात कब हो गइल

रात कब हो गइल, खुशी कब खो गइल, आँख कब रो गइल?
तोहरा वियोग में अस डूबल रहीं कि कुछ पता ना चलल.




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तन के, मन के

तन के, मन के, घर आंगन के कीचड़ पाँक हटा दीं.
प्रेम प्रीत के रंग अबीर हँस के खूब लगा दीं.

आज के काम

आज के काम काल्हु कइल जाई,
काल्हु के परसो.
जल्दी जल्दी का बा जब,
जिए के बा अभी बरसों.

साँच के हरान भले

साँच के हरान भले कर दिहल जाव,
हरावल ना जा सके.
साँच पर टिकल रहऽ ऐ दोस्त,
आखिरी जीत तहरे होखी.

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