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ना जाने कइसन

ना जाने कइसन

ना जाने कइसन एह जुग के असर बा,
पाथर का पहरा में शीशा के घर बा.




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नदी में जहाज तू

नदी में जहाज तू,
अकास में के चाँद तू.
फूल में गुलाब तू,
हीरा में कोहिनूर तू,
सबले बढ़ के
हमरा बाग के लंगूर तू!

गठरिया तोर कि मोर

गठरिया तोर कि मोर?
अगर कहलसि कि मोर त
पहिले कपरवा फोड़
फेर गठरिया छोड़.

मीठ कि जइसे

मीठ कि जइसे होखे मिसिरी,
तीत कि जइसे मिरचा झूठ.
इयार के बोली के कुछ सवादे आउर होला.
बस तू कहत रहऽ
हम सुनत रहीं!

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