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पेन्सिल पाँच बाति सिखावेले

पेन्सिल पाँच बाति सिखावेले

पेन्सिल पाँच बाति सिखावेले :-
जवन कुछ करबऽ ओकर निशान रहि जाई
तू आपन गलती हमेशा सुधार सकेलऽ.
असल चीज ऊ बा जवन तहरा भीतर बा.
जिन्दगी अक्सरहाँ दुखदायी तरीका से तहरा के चोख करी.
आ सबसे बड़ बाति ई कि
अपना के उपरवाला के इशारा पर छोड़ दऽ जेकरा हाथ तहरा के सम्हरले बा.




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आपन खयाल रखीहऽ

आपन खयाल रखीहऽ ! ना.
जीते वाला आपन खयाल ना राखे,
ऊ जिम्मेदारी उठावेला, जोखिम उठावेला,
आ हालात पर काबू राखेला !

समय से पहिले

समय से पहिले आ भाग्य से अधिका,
ना तऽ मिलल बा, ना मिली.
बाकिर तहरा का मालूम कि तहरा भाग्य में कतना बा आ तहार समय कब आई ?
एहिसे तू बस हरदम लागल रहऽ !

मरल आस- विश्वास

मरल आस- विश्वास जो अउर गइल मन हार.
तब बूझीं जे आदमी, भरलो-पुरल भिखार.

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